“सीईओ मैडम का तुगलकी फरमान या तानाशाही राज?” — लैलूंगा में सरपंच संघ का हल्ला बोल
“सीईओ मैडम का तुगलकी फरमान या तानाशाही राज?” — लैलूंगा में सरपंच संघ का हल्ला बोल

लैलूंगा। जनपद पंचायत लैलूंगा इन दिनों सियासी नहीं, बल्कि प्रशासनिक भूचाल का केंद्र बना हुआ है। सीईओ प्रीति नायडू के खिलाफ सरपंच संघ ने मोर्चा खोल दिया है और हालात अब सीधे टकराव की स्थिति में पहुंच चुके हैं।
गांवों के मुखिया माने जाने वाले सरपंच और पंचायत सचिवों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आरोप है कि सीईओ का रवैया अब प्रशासनिक नहीं, बल्कि दमनकारी होता जा रहा है।
“जब चाहे रात में धावा” — दहशत में पंचायत अमला
सरपंच संघ का कहना है कि सीईओ द्वारा बिना सूचना देर शाम या रात में पंचायत पहुंचना, ताला तुड़वाकर जांच करना अब आम बात हो गई है।
सवाल उठ रहा है
क्या यही प्रशासनिक प्रक्रिया है?
या फिर अधिकारियों के नाम पर डर का माहौल बनाया जा रहा है?
“प्रताड़ना की हद पार” — सचिवों का फूटा गुस्सा
पंचायत सचिवों का आरोप है कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, छोटी-छोटी बातों पर नोटिस, दबाव और अपमानजनक व्यवहार अब रोजमर्रा का हिस्सा बन चुका है।
एक सचिव ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —
“काम करने से ज्यादा अब बचाव में ऊर्जा लग रही है।”
सरपंच संघ का ऐलान — “अब चुप नहीं बैठेंगे”
सरपंच संघ ने साफ कर दिया है कि यह मामला अब सिर्फ नाराजगी तक सीमित नहीं रहेगा।
धरना-प्रदर्शन शुरू हो चुका है
बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दे दी गई है
उनका कहना है —
“अगर यही रवैया जारी रहा, तो पंचायत स्तर पर काम ठप हो सकता है।”
बड़ा सवाल — प्रशासन जागेगा या बढ़ेगा विवाद?
पूरा मामला अब जिला प्रशासन की साख से भी जुड़ गया है।
अगर समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह विवाद जनपद स्तर से निकलकर जिलेभर में आग पकड़ सकता है।
“जांच या जुल्म?”
लैलूंगा में अब चर्चा सिर्फ एक ही है —
क्या यह सख्ती है या मनमानी?
क्या जांच के नाम पर डर का माहौल बनाया जा रहा है?
सरपंच संघ का हल्ला बोल साफ संकेत दे रहा है — अब मामला शांत होने वाला नहीं है, बल्कि और भड़कने वाला है।

